बहन भाई का प्यार | Behan Bhai Ka Pyar

 Behan Bhai Ka Pyar - भाई और बहन का प्यार बड़ा ही नाजुक होता है आज की कहानी में हम  Bhai behan ka pyar पर एक Achhi Kahani बताने जा रहे है जिसे पढ़ कर आप को भाई या बहन होने पर गर्व होगा वैसे Bahan aur bhai ka pyar सब के लिए अलग अलग होता है दुनिया में भाई और बहन का रिस्ता बहुत ही खूबसूरत मन जाता है भाई और बहन आपस में बहुत लड़ाई करते है कुछ देर नाराज होते है लेकिन इनके प्यार में कोई कमी नहीं होती है भाई और बहन के रिश्ते को अटूट मानते है जो बहुत मजबूत होता है।

 Behan Bhai Ka Pyar
 Behan Bhai Ka Pyar


बहन भाई का प्यार  | Behan Bhai Ka Pyar

मेरा परिवार असम  के एक छोटे से गांव में रहते थे परिवार में ममी, पापा और छोटी बहन थी| ये बात तब की है जब में और मेरी बहन आठवीं  क्लास में पड़ते थे | एक बार मई और मेरी बहन खेलने के लिए पास के ही बगीचे में चले गए वह बगीचा कुछ सालो से बंद पड़ा था क्युकी इसका मालिक मर चूका था | कई लोगो का मानना था की उसकी आत्मा अभी भी यही रहती है बगीचे के पास ही एक आम का पेड़ था तो हमने आम खाने का फैसला किया में आम तोड़ने  के लिए पेड़ पर चढ़ने लगा अचानक से मुझे लगने लगा की कोई मुझे पेड़ पर चढ़ने के लिए मना कर रहा है लेकिन आस पास कोई नहीं था हमें भी कुछ दर लगने लगा और हम घर पर आ गए | मेरी बहन को डर लग कही सच में वो भुत तो नहीं था ये सोचकर मुझे भी कुछ कुछ डर लग रहा था | पूरी रात नींद तो नहीं आई लेकिन क्या कर सकते थे इस लिए बिस्तर पर आँख बंद कर लेटे रहे मेरी बहन को तो पूरी रात ही नींद नहीं आई थी डर दिल में जो बैठ चूका था 
अगली ही सुबह मेरी बहन को बहुत तेज बुखार हो गया पापा डॉक्टर को जल्दी से घर भुला लाये डॉक्टर ने कुछ जांच की और दवाई देकर चले गए लेकिन बहन की हालत में कोई सुधार नहीं आया दो दिन बाद रात के ३ बज रहे थे तभी बहन की जोर जोर से रोने की आवाज आने लगी हम सभी भाग कर बहन के पास गए हम देखते ही रह गए उनका शरीर काला पड़ने लग गया था शरीर पर अजीब से दाने निकल गए थे पापा ने तुरंत बहन को लेकर शहर के बड़े हॉस्पिटल में लेकर गए सभी डॉटर ने अपना काम शुरू किया कुछ देर बाद जांच की गई सभी डॉक्टर आप में ही कुछ बतला रहे थे  हमें बहुत डर  लग रहा था कही कुछ ज्यादा तो नहीं हो गया  कुछ देर बाद डॉक्टर पापा को अपने रूम में बुलाता है और कहता है की हमें सभी जांच की लेकिन सभी जांच नार्मल है हमें भी कुछ समज नहीं आ रहा है क्या किया जाये तभी मुझे बगीचे वाली बात याद आई पापा को मेने सब कुछ बता दिया पापा तुरंत मुझे अपनी गाड़ी में लेकर उस बगीचे को देखने निकल पड़े


जैसे ही हम बगीचे के पास बहुचे आसमान में काले बादल छाने लग गए सच में वो पल बहुत भयानक था साला दिन में भी डर लग रहा था पापा ने मुझे गाड़ी में रहने को कहा और खुद ही बगीचे के अंदर जाने का फैसला लिया और अंदर चले गए दो घंटे बीत लेकिन पापा बगीचे से बहार नहीं आये और सूरज भी अस्त होने को था तो मेने अंदर जाने का फैसला किया 

दोस्तों आप में बता नहीं सकता में अंदर से  डरा हुआ था जैसे ही मेने बगीचे के अंदर प्रवेश किया तो मुझे अजीब सा लगने लगा जैसे कोई मुझे घूर रहा है | इसके बाद मेने बगीचे के अंदर पापा को ढूंढ़ने लगा सभी तरफ देखा लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ इतनी देर में जोर जोर से हवा चलने लगी बगीचे के बहार कुत्ते रोने लगे में अब पूरी तरह डर गया था पापा और बहन को भी बचाना था एक भाई और बेटा  होने का फर्ज निभाना भी जरुरी था चाहे जान भी क्यों नहीं चली जाये

लगभग 10 मिनट बाद मेने बगीचे से बहार निकने के लिए आगे बढ़ा जैसे ही मेने बगीचे के मुख्य दरवाजे से बहार निकला तो में किसी और ही दुनिया में पहुंच चूका था | आप यकीन नहीं करोगे आसपास बहुत से लोग चीला रहे थे सभी को तेल की कड़ाई में डाला जा रहा था अब मुझे लगने लगा की शायद में मर चूका हु और में यमराज के पास पहुंच रहा हु| मुझे कुछ समझ आता इस से पहले ही मुझे सामने पापा दिखाई दिया बहुत ही जख्मी हालत में थे वो पल मेरे लिए बहुत ही दुखद पूर्ण था मेरे पुरे परिवार की जिंदगी खतरे में थी अब मुझे ही कुछ करना था

बहन भाई का प्यार  | Behan Bhai Ka Pyar

पापा ने बहुत ही मुश्किल से बताया की कुछ दूर आगे एक महल आएगा वहा पर एक साधु मिलेगा उनसे आप को एक ताबीज लेकर आना है वो ही तुम्हारी बहन की जान बचा सकता है  अब मुझे जाना पड़ेगा लेकिन पापा को भी इस हालत में नहीं छोड़ सकता था ऐसा बेटा ही किस काम का जो अपने पिता को इस हालत में छोड़ कर चला जाये | अब मुझे कुछ समझ  नहीं आ रहा था क्या किया जाये|

पापा के बार बार बोलने पर मुझे वह से जाना पड़ा जैसे ही मेने उस संत के पास पंहुचा बहुत डर गया क्योकि उसके शरीर पर चमड़ी नहीं थी उसका केवल कंकाल ही बचा हुआ था मुझे विश्वास नहीं हो रहा था की हमारा परिवार कुछ ही दिन में इस प्रकार संकट में आ जायेगा आसपास कुछ आकृतिया बनी हुई थी कुछ देर छानबीन करने पर देखा की वो माहत्मा के शरीर पर चमड़ी आ चुकी थी अब मेने संत के पास जाकर सभी घटना का विवरण दिया और एक ताबीज बनाकर दिया और कुछ अन्न के बीज दिया और कहा की अपनी आँख बंद करके अपने पीछे फेक देना आप अपनी दुनिया में लोट जाओगे लेकिन अभी मुझे अपने पिता को भी साथ लेना था तो में जल्दी से निकल पड़ा और पापा को साथ लेकर अपनी दुनिया में लोट आया
Bahan aur bhai ka pyar
अब हमें हॉस्पिटल पहुंचना था जहा हमारी बहन का इलाज चल रहा था हमने बहन के हाथ पर ताबीज जोड़ दिया अब वो धीरे धीरे होश में आने लगी लेकिन समस्या तो अब शुरू होने वाली थी जो की आप सभी को अगले भाग में उपलब्ध होगी 
आप यह कहानी Achhi Kahani पर पढ़ रहे है आशा करता हु कहानी आप को पसंद आई होगी